It has been 16 years , when you left us all alone…. cannot forget you for a single moment…
राह में आते जाते ,
कभी किसी वृद्ध महीला को देख ,
तुम्हारी छवि आँखों में आ जाती है माँ ……
बालों में चांदी ,
थोडे झुके से कंधे,
उम्र के बोझ से
थकी थकी सी चाल …..
जानते हुए भी की वह तुम नही हो
बरबस मुड के देख लेती हूँ ,
कहीं वह तुम तो नहीं माँ……
एक आभास सा होता है,
तुमने आवाज़ दी है,
तुम मेरे आसपास ही हो ….
पर तुम यहाँ नहीं हो कर भी ,
मेरे पास ही हो मॉं …….
कैसे अलग कर पाऊंगी
अपने अस्तित्व को तुमसे मैं
तुम मुझ में ही तो समायी हो , है ना मॉं ?
जब कोमल थे पंख मेरे ,
जब कमजो़र थे हौसले मेरे
तुमने ही तो बलशाली बनाया था ना मुझे मॉं….
खुद कमजो़र हो कर भी
एक चट्टान की तरह ,
हमें आँधी तूफान से
बचाया था ना तुमने मॉं…
कैसी अद्भुत शक्ति थीं तुम ,
कैसा मजबूत साया थीं तुम ,
अपनी कमज़ोर अवस्था में भी ,
कैसे हम सब का सहारा थीं तुम!!!!
कोई दिन नहीं बीतता ,
कोई घड़ी नहीं जाती
जब तुम्हारी सिखायी कोई
बात मुझे याद नहीं आती …..
लड़ती झगड़ती थी मैं
हर बात पर तुमसे ,
रूठती और मुंह फुलाती थी ….
कभी प्यार से , कभी फटकार से
हमेशा सही दिशा बताती थीं तुम….
हर मुसीबत में ,
हर कठिनाईं में
हौले से , प्यार से , अपने साथ मुझे
तरकर ले जाती थीं तुम…..
गुमसुम उदास आज भी हूं मैं
जाने तुम कहॉं खोई हो ….
हमें यहॉं अकेला छोड़ कर
जाने किस लोक में गुम हो गई हो तुम
मॉं ….
मुमकिन नहीं अब तुम्हें फिर से देख पाना
फिर भी अपने होने का
अहसास जतलाती रहो तुम मॉं ….
मुझे अभी भी बहुत याद आती हो तुम
मॉं……..
स्मित

very emotional
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Tysm!
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You have penned it so well, can feel the emotions!
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