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Realisation

I stood on the seashore Feet planted deep Waves came lapping up And washed the sand, under my feet …  I gazed at the dark deep blue expanse   stretched  in front of me   hiding fierce force ; Yet, the waves played by  gently along my feet…… Far away at the horizon  darkness started dispelling  Pink … Continue reading Realisation

हौसला 

आँखों में उसके दृढ़ता छायी थीशायद उसने एक गहरी चोट खाई थीमूल्यों का यहाँ कोई मोल नहींज़माने ने उसे यह तस्वीर दिखाई थी    ज़िद थी उसकी अबकी ठन जाने दो औरों से जो बन न सकी बातआज सबके सामने वह बात बन जाने दो  है गुरुर उन्हें अपनों पर तो हमारे हौसलों का भीइम्तहान हो जाने दो   … Continue reading हौसला 

गांधारी का श्राप

धूल धूसरित रक्त रंजित धरा आर्त्त रुदन से कंपित हो रही प्रजा दसों दिशाओं में बिखरी  क्षत विक्षत सेना  यह कैसा प्रयोजन है तुम्हारा; केशवा ?  गांधारी ने विलाप करते  अपने पुत्रों का स्मरण किया  वो पाँच और मेरे शत फिर विनाश का कैसा यह तांडव? तुम तो दयानिधी दयालु हो सृष्टि के नियंता हो … Continue reading गांधारी का श्राप

ज़िंदगी

कुछ पाने की चाह में  कुछ छूटता चला गया  क्या पाया , क्या खोया  कौन हिसाब रखे ? कांटो के बीच फूल  बहारों से खिला  चमन  ढूँढ ही लेती है तितली अमृत से  भरा सुमन  ख़ुशियों के फूल चुन कर भर लो अपना आँचल  क्या हुआ जो साथ साथ   चुभते रहे काँटे  मिल ही … Continue reading ज़िंदगी

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