आँखों में उसके दृढ़ता छायी थी
शायद उसने एक गहरी चोट खाई थी
मूल्यों का यहाँ कोई मोल नहीं
ज़माने ने उसे यह तस्वीर दिखाई थी
ज़िद थी उसकी अबकी ठन जाने दो
औरों से जो बन न सकी बात
आज सबके सामने वह बात बन जाने दो
है गुरुर उन्हें अपनों पर तो
हमारे हौसलों का भी
इम्तहान हो जाने दो
मुश्किल ही सही , नामुमकिन तो नहीं
मंज़िल मिलेगी ज़रूर , देर से ही सही
ज़रा खुल कर यह फ़ैसला भी हो जाने दो !!
स्मित
