कुछ पाने की चाह में
कुछ छूटता चला गया
क्या पाया , क्या खोया
कौन हिसाब रखे ?
कांटो के बीच फूल
बहारों से खिला चमन
ढूँढ ही लेती है तितली
अमृत से भरा सुमन
ख़ुशियों के फूल चुन कर
भर लो अपना आँचल
क्या हुआ जो साथ साथ
चुभते रहे काँटे
मिल ही जाएगा हमें
अपने हिस्से का बादल …
ना कल की फ़िक्र सताये हमें
ना बीते कल की बात
आज बस जी लो इस पल में
यही है हमारी सौग़ात……
अंजुली भर पानी पीना
है हमारी नियति
ना कर ज़िद्द बटोरने की
सदा है सरिता बहती ..
नील गगन में टिमटिमाता
इक छोटा सा तारा
क्या हस्ती तेरी
कहाँ ये आसमान सारा !
क्या समेट लें
क्या छोड़ दें
ऊहापोह है गहरी
कश्मकश में हैं बड़े
क्या इसी का नाम है
ज़िंदगी ?
स्मित
